मेरे प्रेम
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मैं तुम्हारे खत को छुपाता रहा
शहर से नजरें बचाता रहा
लोगों में कम से कम यकीं तो था
तुम्हे भी मुझसे कभी प्यार था
मेरे प्यार का शायद यही अंजाम था
तेरा खत बिलकुल सरेआम था
नम आँखे लिए पूरा बाजार था
तुम्हे मुझसे कभी "न" प्यार था
हश्र प्रेमी का एक दिन होना ही था
बीच सेहरा मेरा सुना मजार था
खत पढ़ते रहे, लोग आते रहे
सुना मजार मेरा आज जार जार था
आह भरते रहे, फूल चढ़ते रहे
तेरे फिकरे का बस इक इन्तजार था
---------------------------अमि त कुमार २०-०६-२०१४
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मैं तुम्हारे खत को छुपाता रहा
शहर से नजरें बचाता रहा
लोगों में कम से कम यकीं तो था
तुम्हे भी मुझसे कभी प्यार था
मेरे प्यार का शायद यही अंजाम था
तेरा खत बिलकुल सरेआम था
नम आँखे लिए पूरा बाजार था
तुम्हे मुझसे कभी "न" प्यार था
हश्र प्रेमी का एक दिन होना ही था
बीच सेहरा मेरा सुना मजार था
खत पढ़ते रहे, लोग आते रहे
सुना मजार मेरा आज जार जार था
आह भरते रहे, फूल चढ़ते रहे
तेरे फिकरे का बस इक इन्तजार था
---------------------------अमि
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