Wednesday, August 6, 2014

तुम जो आये नहीं 
पीले फूल कास के 
फिर भी मुरझाये नहीं 

इस कोमल कुसुम की
अदम्य साहस तो देखिये
पंखुड़ी पे जो ओस जमे थे 
शाम तक ढल पाये नहीं 

तुम जो आये नहीं.... 

नव वृन्त भी डाली पे
श्रृंगार रस में डूब चुकी
बेला कब की बीत चुकी
वसंत अभी तक आये नहीं

तुम जो आये नहीं .....

प्रतीक्षा में विह्वलता से
पथ में खड़े थे बन पराग
तुफानो का दौर चला
पर मंजर बदल पाये नहीं

तुम जो आये नहीं.....

संवेदना ही मनुज को
मनुज सा बनाती है
एकाकीपन तो जन्मो से,
उर से प्रेम मिट पाये नहीं

तुम जो आये नहीं ....
जीना है और फिर खो जाना है, 
तेरी कहानी और क्या होना है!

चन्द सांसो की ये जिंदगी
घुट घुट के यहाँ क्या रोना है
जाना ही है तो इतना हसना 
मौत को भी उस दिन शर्माना है 

जीना है और फिर खो जाना है, 
तेरी कहानी और क्या होना है!
मेरे प्रेम
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मैं तुम्हारे खत को छुपाता रहा 
शहर से नजरें बचाता रहा 

लोगों में कम से कम यकीं तो था 
तुम्हे भी मुझसे कभी प्यार था 

मेरे प्यार का शायद यही अंजाम था 
तेरा खत बिलकुल सरेआम था

नम आँखे लिए पूरा बाजार था
तुम्हे मुझसे कभी "न" प्यार था

हश्र प्रेमी का एक दिन होना ही था
बीच सेहरा मेरा सुना मजार था

खत पढ़ते रहे, लोग आते रहे
सुना मजार मेरा आज जार जार था

आह भरते रहे, फूल चढ़ते रहे
तेरे फिकरे का बस इक इन्तजार था

---------------------------अमित कुमार २०-०६-२०१४