तुम जो आये नहीं
पीले फूल कास के
फिर भी मुरझाये नहीं
इस कोमल कुसुम की
अदम्य साहस तो देखिये
पंखुड़ी पे जो ओस जमे थे
शाम तक ढल पाये नहीं
तुम जो आये नहीं....
नव वृन्त भी डाली पे
श्रृंगार रस में डूब चुकी
बेला कब की बीत चुकी
वसंत अभी तक आये नहीं
तुम जो आये नहीं .....
प्रतीक्षा में विह्वलता से
पथ में खड़े थे बन पराग
तुफानो का दौर चला
पर मंजर बदल पाये नहीं
तुम जो आये नहीं.....
संवेदना ही मनुज को
मनुज सा बनाती है
एकाकीपन तो जन्मो से,
उर से प्रेम मिट पाये नहीं
तुम जो आये नहीं ....
पीले फूल कास के
फिर भी मुरझाये नहीं
इस कोमल कुसुम की
अदम्य साहस तो देखिये
पंखुड़ी पे जो ओस जमे थे
शाम तक ढल पाये नहीं
तुम जो आये नहीं....
नव वृन्त भी डाली पे
श्रृंगार रस में डूब चुकी
बेला कब की बीत चुकी
वसंत अभी तक आये नहीं
तुम जो आये नहीं .....
प्रतीक्षा में विह्वलता से
पथ में खड़े थे बन पराग
तुफानो का दौर चला
पर मंजर बदल पाये नहीं
तुम जो आये नहीं.....
संवेदना ही मनुज को
मनुज सा बनाती है
एकाकीपन तो जन्मो से,
उर से प्रेम मिट पाये नहीं
तुम जो आये नहीं ....
No comments:
Post a Comment