Thursday, March 13, 2008

Buddha

सच का पता पाने के लिए,
दर दर भटक रहा था बुद्धा.
मिल गयी चिर शांति उसे,
जब पीपल तले बैठा था बुद्धा.

अर्थ निहित में कार्य करके
जिंदगी हम क्यूँ तमाम करते हैं
मन के किसी कोने में देखो
मौन खडा है तेरा बुद्धा.

अंतहीन अंधियारी गलियों में,
चलते हैं अनवरत राही पर
क्या किसी ने जाना पथ पर
सिसक रहा क्यूँ तेरा बुद्धा.

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